| ۱- |
خال دیدم، خالِ مُشکین فام را |
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دانه را دیدم، ندیدم دام را |
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| ۲- |
مَردِ عاقل می کند آغازِ کار |
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پیش بینی، نَحوهِ انجام را |
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| ۳- |
پیشِ پایِ خویش اوّل بنگرد |
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نیک و بردارد پس آنگه گام را |
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| ۴- |
مَردِ رند امّا چنین محتاط نیست |
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گام بردارد که گیرد کام را |
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| ۵- |
با جسارت می تواند جلب کرد |
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مِهرِ هر مَهرویِ سرو اندام را |
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| ۶- |
شام را با عیش و نوش آرَد به صبح |
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صُبح دارد آرزویِ شام را |
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| ۷- |
من که در دنیا نه مُحتاطم نه رِند |
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می کشم بارِ غم ایّام را |
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| ۸- |
بی زر و بی زور، روز و ماه و سال |
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می کنم سنگین سبک آلام را |
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| ۹- |
باز باز آمد «جلالی» ساقیا |
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دست او خالی ست، پر کن جام را |
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