| ۱- |
حُسن، هر جا که بُوَد، موردِ تحسینِ من است |
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مایه ی شادی و شورِ دل غمگینِ من است |
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| ۲- |
رویِ زیباست نشانی ز خداوندِ جمیل |
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هر که را، هست، پرستیدنش آیین من است |
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| ۳- |
هر گُلی را که درآورده سر از باغ بلوغ |
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آری آن نوگُلِ رعنا، گُل و نسرین من است |
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| ۴- |
من چو فرهادم و آن خسروِ شیرین دَهنان |
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شهرهِ شهر شما، شاهد شیرین من است |
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| ۵- |
عامل کشف و شناسایِ تو ای جانِ جهان |
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یک نگاه و نظرِ چشم جهان بینِ من است |
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| ۶- |
دیگران گر ز ملاقاتِ تو محروم شدند |
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این ز عزمِ تو و از قدرتِ تلقین من است |
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| ۷- |
شده از پاسخِ نفیِ تو سیه رویی سرخ |
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او رقیب است و رُخَش سفره ی رنگین من است |
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| ۸- |
همه شب وردِ «جلالی» سخن حافظ بود |
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«روزگاریست که سودایِ بُتان دین من است» |
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