| ۱- |
به سویِ کویِ تو هر صبح زود راه من است |
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رواقِ میکده هر شب پناهگاه من است |
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| ۲- |
به پیشِ روی تو افتاده ام به خاک، چرا |
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به پشتِ معرکهِ عاشقان کلاهِ من است |
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| ۳- |
وفا ندیده، مُصِرَّم به پای بندیِ تو |
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خطا نکرده مُقِرَّم که این گناه من است |
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| ۴- |
تو سر سپرده تر از من دگر نخواهی یافت |
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مگو دو صد چو تو پابَندِ پیشگاهِ من است |
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| ۵- |
کنارِ آبِ حیاتِ لبِ نو هندویِ خال |
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حریص و تشنه تر از مَردُمِ نگاه من است |
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| ۶- |
هلاکِ چاه زنخدانِ تُست یوسف و او |
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بدان اشاره، تفاخُر کند که چاهِ من است |
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| ۷- |
سیاه روزتر از من کسی نشد پیدا |
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مگر «جلالی» و آن هم ز دودِ آه من است |
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