| ۱- |
دوست کمیاب است و باشد بی بدیل |
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آشنا خوان دیگران را هر قبیل |
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| ۲- |
امتحان کن آشنا را و مکن |
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در ردیف دوستانت بی دلیل |
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| ۳- |
تا مبادا فردِ نابابی شود |
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در میان دوستانت مستحیل |
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| ۴- |
آشنا و دوست را تشخیص ده |
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ز آنکه باشد آن کثرت و این قلیل |
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| ۵- |
تا کدامین را نمایی انتخاب |
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چون شب و روزند نمرود و خلیل |
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| ۶- |
گر سخاوتمند باشد برگزین |
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بگذر از خیرش اگر باشد بخیل |
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| ۷- |
دست مال اندوز بیرون آورد |
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سکّه های پول زیر پای پیل |
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| ۸- |
خوبرویان را «جلالی» دوست دار |
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چون که دارد دوست اَللهُ الجَمیل |
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