| ۱- | کلک مشکین تو روزی که ز ما یاد کند |
| ببرد اجر دو صد بنده که آزاد کند | |
| ۲- | قاصد حضرتِ سلمی که سلامت بادش |
| چه شود گَر، به سلامی دل ما شاد کند | |
| ۳- | امتحان کُن که بسی گنج مُرادت بدهند |
| گر خرابی چو مرا، لطف تو آباد کند | |
| ۴- | یا رب اندر دل آن خسرو شیرین انداز |
| که به رحمت گذری بر سر فرهاد کند | |
| ۵- | شاه را به بود از طاعت صدساله و زهد |
| قدر یک ساعته عمری که درو داد کند | |
| ۶- | حالیا عشوهِ عشق تو ز بنیادم برد |
| تا دگر باره حکیمانه چه بنیاد کند | |
| ۷- | گوهر پاک تو از مدحت ما مستغنی ست |
| فکر مشّاطه چه با حسن خداداد کند | |
| ۸- | ره نبردیم به مقصود خود اندر شیراز |
| خرّم آن روز که حافظ ره بغداد کند |
