| ۱- |
کیست گوید به من آن نوگُلِ گلزار کجاست |
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نوبتِ وعده کی و وَعدهِ دیدار کجاست |
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| ۲- |
آن که می بود کلامش چون شکرقند چه شد |
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آن که لعلِ لبِ او بود شکربار کجاست |
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| ۳- |
ما به دستِ تو سپردیم گُلِ زلفِ عروس |
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ای نسیم آن گل و آن زلف نگون سار کجاست |
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| ۴- |
رفت و یادی دگر از هم قفسِ خویش نکرد |
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که درونِ قفس آن مرغِ گرفتار کجاست |
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| ۵- |
هر چه دیدیم همه دُزد و کُله بردارند |
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رِندِ عیّار چه شد لوطیِ بازار کجاست |
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| ۶- |
همه در میکده مستند و خمارانی چند |
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خُفته دیدم به دَرِ میکده هشیار کجاست |
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| ۷- |
شاخهِ ثابتِ پرگارِ فَلک سیر بُوَد |
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در دلِ عارف و آن شاخهِ سیّار کجاست |
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| ۸- |
خار در دَست وز خون سرخ سرِ انگشت و دو چشم |
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خیره بر خار که آیا گُلِ بی خار کجاست |
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| ۹- |
این شگفت آمدم از پرسشِ گُم کرده خری |
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از «جلالی» که ندانی تو که افسار کجاست |
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