| ۱- |
این غزل وصفِ قدّ و قامتِ اوست |
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مَطلَعَش آیتی ز طلعتِ اوست |
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| ۲- |
سرو و شمشادِ باغ و طوبیِ خُلد |
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چشمِ هر یک به سروِ قامتِ اوست |
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| ۳- |
دورِ شیرین گذشت و لیلی و حال |
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دورِ این گلعُذار و نوبت اوست |
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| ۴- |
سَرِ کویش اگر که خاک نشین |
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شده ام، مقصدم زیارتِ اوست |
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| ۵- |
آنچه بینی در آسمان شب ها |
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ماه من نیست، عکس صورت اوست |
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| ۶- |
دلِ من را شکست و می بینم |
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باز، دِل، بستهِ محبّتِ اوست |
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| ۷- |
اِحترامم نگه نمی دارد |
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گر خموشم به پاسِ حُرمتِ اوست |
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| ۸- |
این صَنَم قسمتِ «جلالی» نیست |
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هر که باشد، بهشت قسمت اوست |
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