| ۱- |
گل که بی خار بود، خوارِ گلستانِ تو باد |
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سروِ سرکش، علفِ هرزهِ بُستان تو باد |
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| ۲- |
هر سری پیش قدومت به ادب خم نشود |
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همچو گو، یکسره اندر خَم چوگان تو باد |
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| ۳- |
نمکین پسته و نقل و شکر و مروارید |
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برخی آن لب خندانت و دندانِ تو باد |
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| ۴- |
من که باشم که به فرمان تو باشم شب و روز |
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ماه و خورشید فلک بندهِ فرمانِ تو باد |
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| ۵- |
یا که باشم که ثناگویِ تو باشم به کلام |
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در چمن مرغِ خوش آواز ثناخوان تو باد |
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| ۶- |
دلم از دست نگهبان شرورت خونست |
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از خدا خواست «جلالی» که نگهبان تو باد |
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