| ۱- |
تا که پر رونق و پر بار بود بازارش |
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دوستی با چو من البتّه بود دشوارش |
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| ۲- |
دورتر از خطّ سیرش سر راهش هر روز |
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ایستم تا به دل سیر، کنم دیدارش |
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| ۳- |
بهر من گرچه نکرده است دو لب باز هنوز |
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جان فدای لب گلنارش و شکر بارش |
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| ۴- |
گر به بستان رود این بلبل سرمست و کند |
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باز لب، مرغ چمن قفل کند منقارش |
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| ۵- |
ای نسیم سحری بر در آن گوش بگوی |
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این پیام من بی دل چو کنی بیدارش: |
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| ۶- |
زلف با سوزن یک گیره به یک سو زن و آن |
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جای دل های عزیز است فرو مگذارش |
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| ۷- |
وآنگهی بوسه بر آن لب زن و ز آن ماه بپرس |
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شود آیا که شوم چاکر و خدمتکارش |
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| ۸- |
گر پذیرفت به او قول ده از جانب من |
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که شب و روز کنم کار و شوم همکارش |
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| ۹- |
روز آزار به خود داده «جلالی» در کار |
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شب کشم نازش و هرگز نکنم آزارش |
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