| ۱- |
ای سراپای وجود و قد و بالای تو خوش |
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سرو جانم به فدایت که سراپای تو خوش |
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| ۲- |
هم سر زلف خم اندر خم پر چین و شکن |
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هم سر و سینه و آن قامت رعنای تو خوش |
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| ۳- |
هم بر و صورت و آن مردم و مژگان سیاه |
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هم بناگوش و سر زلف سمن سای تو خوش |
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| ۴- |
به تماشای تو ای لولی سرمست ملوس |
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چشم دل سوی تو دارم که تماشای تو خوش |
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| ۵- |
باز کن لب که شود این دل سودا زده ام |
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به هوای لب و دندان شکرخای تو خوش |
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| ۶- |
دل خوشم از نگه گرم نشاط افزایت |
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خوش دلم ز آن که بود چهره زیبای تو خوش |
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| ۷- |
خوش «جلالی» سخن موجز حافظ برخواند: |
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«ای همه شکل تو مطبوع و همه جای تو خوش» |
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