| ۱- |
نیست این رسم و ره عقل گر عاقل باشی |
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که اسیر دل دیوانه غافل باشی |
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| ۲- |
دل دیوانه بود مرکز احساس و هوس |
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حیف باشد که تو دیوانه این دل باشی |
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| ۳- |
دل نگهدار ولی با کمک و همّت عقل |
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تا توانی که یکی عاقل خوش دل باشی |
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| ۴- |
ورنه این دل کندت دور ز ارباب خرد |
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تا به جایی که یکی مهره باطل باشی |
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| ۵- |
تشنه لب باش ولی جانب مرداب مرو |
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گر نخواهی که فرو رفته در گِل باشی |
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| ۶- |
بحر طوفان زده را بهر شنا پیش مگیر |
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خواهی ار ناظر آسوده به ساحل باشی |
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| ۷- |
تو، «جلالی» چکنی روزی اگر بازی دل |
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«صید آن شاهد مطبوع شمایل باشی» |
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