| ۱- | همای اوج سعادت به دام ما افتد |
| اگر تو را گُذری بر مقام ما افتد | |
| ۲- | حُباب وار براندازم از نشاط کلاه |
| اگر ز روی تو عکسی به جام ما افتد | |
| ۳- | شبی که ماه مُراد از افق طلوع کند |
| بود که پرتو نوری به بام ما افتد | |
| ۴- | به بارگاه تو چون باد را نباشد بار |
| کی اتّفاق مجال سلام ما افتد | |
| ۵- | چو جان فدای لبت شد خیال می بستم |
| که قطره ای ز زلالش به کام ما افتد | |
| ۶- | خیال زلف تو گفتا که جان وسیله مساز |
| کزین شکار، فراوان به دام ما افتد | |
| ۷- | به ناامیدی ازین در مرو بزن فالی |
| بود که قرعه ی دولت به نام ما افتد | |
| ۸- | ز خاک کوی تو هر گه که دم زند حافظ |
| نسیم گلشن جان در مشامِ ما افتد |
