| ۱- | روز هجران و شب فُرقت یار آخر شد |
| زدم این فال و گذشت اختر و کار آخر شد | |
| ۲- | آن همه ناز و تنعُّم که خزان میفرمود |
| عاقبت در قدم باد بهار آخر شد | |
| ۳- | شکر ایزد که به اقبال کله گوشه گُل |
| نخوت بادِ دی و شوکت خار آخر شد | |
| ۴- | صبح امید که شد معتکف پرده غیب |
| گو برون آی که کار شب تار آخر شد | |
| ۵- | آن پریشانی شبهای دراز و غم دل |
| همه در سایه گیسوی نگار آخر شد | |
| ۶- | باورم نیست ز بدعهدی ایّام هنوز |
| قصّه غُصّه که در صحبت یار آخر شد | |
| ۷- | ساقیا لطف نمودی قَدحَت پرمی باد |
| که به تدبیر تو تشویشِ خمار آخر شد | |
| ۸- | در شمار ار چه نیاورد کسی حافظ را |
| شکر کان محنت بیرون ز شمار آخر شد |
